सूरजकुंड मेले में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे नारियल के घोंसले
Faridabad : 02 फरवरी। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में इस बार प्रकृति और कला का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में नारियल के रेशों से बने आकर्षक घोंसले, कलाकृतियां और हस्तशिल्प उत्पाद मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पंचकुला से आए शिल्पकार अमर सिंह द्वारा स्टॉल नंबर 196 पर नारियल के रेशों और खोल से तैयार घोंसले लाए गए है। ये पर्यावरण-अनुकूल घोंसले पर्यटकों द्वारा काफी पसंद किए जा रहे हैं। मेले में देश भर से आए सैलानी इन इको-फ्रेंडली नारियल उत्पादों की खूब खरीदारी कर रहे हैं।
शिल्पकार ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
स्टॉल संचालक और शिल्पकार अमर सिंह ने बताया कि वे लंबे समय से सूरजकुंड मेले का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मंच शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। ये आयोजन आत्मनिर्भर भारत के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
शिल्पकार अमर सिंह ने बताया कि नारियल के खोल का उपयोग कर बनाए गए ये घोंसले न केवल सजावटी हैं, बल्कि चिड़ियों के लिए एक सुरक्षित घर भी हैं। विशेष रूप से पक्षियों के लिए बनाए गए ये घोंसले शहरी क्षेत्रों में प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बने हुए हैं। नारियल के खोल से बने ये घोंसले सजावट के साथ-साथ चिड़ियों के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक घर भी प्रदान करते हैं।



