कौड़ी-दमड़ी से 1000 का सिक्का: सतीश सिंघल के म्यूजियम में इतिहास जिंदा

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फ़रीदाबाद: (अनुराग शर्मा) फरीदाबाद की हवा में आज भी वो पुरानी खुशबू बसी है—जहां हर सिक्का एक प्रेमी की तरह चमकता है। क्या तुमने कभी 1000, 200 या 500 के उन दुर्लभ सिक्कों को देखा, जो कौड़ी-दमड़ी की सादगी से राजा-महाराजाओं के वैभव तक का सफर तय करते हैं?सतीश सिंघल, लिम्का रिकॉर्ड होल्डर, इस म्यूजियम के मालिक हैं। उनके लिए ये सिक्के शौक नहीं, बल्कि “इतिहास को बचाने की कोशिश” हैं—एक प्रेमी की तरह। कल्पना करो: एक युवा जोड़ा म्यूजियम पहुंचता है। लड़की एक चमचमाते 1000 के सिक्के को छूती है, और लड़का फुसफुसाता है, “ये वैसा ही है जैसे हमारा प्यार—पुराना, मजबूत, समय की मार झेल चुका।”संग्रह में हर सिक्का मोहब्बत की मिसाल देता है। कौड़ियां कहती हैं, “सादगी में ही असली इश्क है,” तो राजसी सिक्के चिल्लाते हैं, “वैभव के बावजूद वफादारी न टूटे।” सतीश जी मुस्कुराते हुए कहते, “ये सिक्के इतिहास के साथ प्रेम की कहानियां भी संजोए हैं। आओ, अपने प्यार को यहां अमर करो।”फरीदाबाद आओ, इस रोमांटिक खजाने में खो जाओ। कौन जानता, शायद तुम्हारा प्रेम भी यहां का सिक्का बन जाए—चिरकालिक!

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