टेराकोटा कला से बनाए कुक्कर और कढ़ाई पर्यटकों को खूब पसंद आए
सूरजकुंड मेला में टेराकोटा कला (पकी हुई मिट्टी) से निर्मित बर्तनों की खूब हो रही बिक्री
खाना बनता है स्वादिष्ट और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी
सूरजकुंड (फरीदाबाद), 10 फरवरी। फरीदाबाद में 39 वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला हस्तशिल्प कला को देश के साथ विश्व भर में पहचान दे रहा है। यह मेला शिल्पकारों के हुनर को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रहा है। इन्हीं में से टेराकोटा कला (पकी मिट्टी से निर्मित वस्तु) से बर्तन तैयार करने वाले शिल्पकारों के स्टॉल पर पर्यटकों की खूब भीड़ लग रही है और इन बर्तनों जमकर खरीदारी भी हो रही है। इन स्टॉल पर टेराकोटा कला से तैयार कुक्कर और कढ़ाई पर्यटकों को खूब पसंद आ रही है।
मेला परिसर में टेराकोटा कला को बढ़ावा दे रहे शिल्पकार ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों में जहां खाना स्वादिष्ट बनता है, वहीं इनमें बना खाना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी लाभकारी होते हैं। इस बार मेला में पकी हुई मिट्टी से बनाए अलग-अलग साइज में कुक्कर और कढ़ाई की काफी मांग है। इसके अलावा मिट्टी के तवे भी पर्यटकों को खूब पसंद आ रहे हैं। वहीं टेराकोटा कला से निर्मित कप, बाउल और मग आदि की भी काफी बिक्री हो रही है। मेला में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकल फॉर वोकल को ये स्थानीय उत्पाद काफी बढ़ावा दे रहे हैं।
संचालक ने बताया कि मिट्टी के कुक्कर, कढ़ाई, तवे और कप आदि के साइज के हिसाब से अलग-अलग रेट हैं। कुकर तीन से चार आकार के साइज के उपलब्ध है। इसी प्रकार परिवार की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग साइज में मिट्टी से बनी कढ़ाई है। वहीं तवे के साइज लगभग सामान्य है। उन्होंने बताया कि टेराकोटा कला से बनाए आकर्षित करने वाले कप, मग और बाउल भी पर्यटकों को खूब पसंद आ रहे हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार और सूरजकुंड मेला प्रशासन का बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए आभार व्यक्त किया।



