फरीदाबाद,1 जनवरी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट ने स्वास्थ्य जगत की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार निमोनिया, यूरिन इंफेक्शन (यूटीआई) और सेप्सिस जैसी सामान्य लेकिन गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल की जाने वाली कई एंटीबायोटिक दवाएं अब पहले जैसी असरदार नहीं रहीं। इसकी सबसे बड़ी वजह बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन और अधूरा कोर्स बताया गया है।
ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर 86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मंचों से एंटीबायोटिक के सोच-समझकर उपयोग की अपील कर चुके हैं। उन्होंने साफ कहा है कि “डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना न केवल व्यक्ति के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा बन सकता है। आईसीएमआर की रिपोर्ट प्रधानमंत्री की इस चेतावनी को सही साबित करती है।
शहर की बात करें तो फरीदाबाद, खासकर ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र में यह समस्या तेजी से उभर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी-खांसी, बुखार या हल्के संक्रमण में भी लोग खुद ही मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक खरीदकर लेने लगे हैं। इससे शरीर में बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) कहा जाता है।
डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक असर नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की रिपोर्ट बिल्कुल जमीनी हकीकत को दर्शाती है। निमोनिया और यूटीआई जैसे मामलों में अब हमें पहले से ज्यादा मजबूत और महंगी दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है, जो हर मरीज के लिए सुरक्षित नहीं होती। उन्होंने लोगों से अपील की कि एंटीबायोटिक को दर्द निवारक दवा की तरह न लें। डॉक्टर द्वारा लिखे गए पूरे कोर्स को पूरा करें और बिना जांच के दवा शुरू न करें। उन्होंने कहा कि अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले समय में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
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