फरीदाबाद, 13 फरवरी 2026: (ANURAG SHARMA) सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हर साल देश-विदेश के व्यापारियों को एकजुट करता है, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो इस मेले की असली धड़कन बन जाते हैं। इन्हींमें शुमार हैं अमदाबाद के सूरेंद्र नगर निवासी नेहा और अरुण, जिनका स्टॉल नंबर 520 पिछले 20 साल से लगातार इस मेले की शोभा बढ़ा रहा है।बेड कवर, रजाई, पिलो कवर और हस्तशिल्प उत्पादों से सजा यह स्टॉल गुजराती कढ़ाई और पारंपरिक डिजाइनों का अनोखा संगम पेश करता है। नेहा बताती हैं, “यह मेला हमारा परिवार है। 20 सालों में हमने उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन सूरजकुंड की मिट्टी ने हमें कभी निराश नहीं किया।” वहीं अरुण जोड़ते हैं, “हमारे उत्पाद ग्राहकों के घरों को गर्मजोशी देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे यह मेला सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।”दिनभर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती रहती है। स्टॉल पर चटख रंगों वाली रजाइयां और फूलों से सजे बेड कवर देखते ही बनते हैं। पर्यटक और स्थानीय खरीदार दोनों ही इसकी तारीफ करते नहीं थकते। सूरजकुंड मेले के आयोजकों ने भी इस जोड़े की लगन की सराहना की है।यह स्टॉल न केवल व्यापार का प्रतीक है, बल्कि मेले की जीवंत परंपरा का जीता-जागता उदाहरण भी। यदि आप सूरजकुंड घूमने जा रहे हैं, तो स्टॉल 520 जरूर जा कर देखें !
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20 साल से सूरजकुंड मेले की शान: स्टॉल नंबर 520 पर नेहा-अरुण का अमदाबाद का जलवा
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