फरीदाबाद, 23 मार्च। शहर ने अन्य रोगों की तरह टीबी की बीमारी भी तेजी से बढ़ रही है। जागरूकता के अभाव में लोग समय पर इलाज नहीं करवाते है, जिससे डॉक्टरों के पास पहुंचने तक बीमार काफी बढ़ जाती है। इसे लेकर ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर 86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल की वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. विद्या नायर ने लोगों को समय जांच ओर इलाज करवाने की सलाह दी है।
हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो बैक्टीरिया के कारण फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकती है। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में भी टीबी के मरीजों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है, खासकर घनी आबादी और मजदूर वर्ग में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।
डॉ. विद्या नायर ने बताया कि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, जिसे पल्मोनरी टीबी कहा जाता है, जबकि शरीर के अन्य हिस्सों में होने वाली टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं। दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहना, छाती में दर्द, भूख कम लगना, तेजी से वजन घटना, खून की खांसी और लगातार थकान इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
अस्पताल ओपीडी में हर महीने 10 से 15 मरीज इलाज करवाने पहुंचते है। इनमें वे मरीज भी शामिल होते हैं जो देरी से इलाज के लिए पहुंचते है, तब तक बीमारी करीब बढ़ गई होती है। ऐसे मरीजों की दवाइयां काफी लंबी चलती हैं। उन्होंने कहा कि टीबी का संक्रमण हवा के जरिए फैलता है। यदि घर या आसपास किसी व्यक्ति को टीबी है, तो उसके खांसने, छींकने या बात करने से अन्य लोग भी संक्रमित हो सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। डायबिटीज, कैंसर, धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोगों में टीबी का खतरा अधिक होता है। इसलिए ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा टीबी का इलाज पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है और मरीजों का रिकॉर्ड भी रखा जाता है। समय पर पहचान और नियमित दवा लेने से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है।



