Faridabad : 31 जनवरी। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि बीजेपी की कुनीतियों ने हरियाणा को सबसे ज्यादा कर्जे वाले राज्यों की श्रेणी में पहुंचाया है। जो हरियाणा 2014 से पहले देश का सबसे समृद्ध राज्य था, उसे बीजेपी ने खस्ताहाल अर्थव्यवस्था वाले राज्यों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।
हुड्डा फरीदाबाद के कई सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करने पहुंचे थे। इस मौके पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। इसका खुलासा रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में हुआ है। हरियाणा देश के सबसे ज्यादा कर्जदार टॉप-5 राज्यों में शुमार हो चुका है।
क्योंकि राज्य का कर्जा 5.25 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। जबकि हरियाणा के गठन से लेकर 2014 तक यह राशि महज 60 हजार करोड़ रुपये थी।
आज प्रदेश पर इतना कर्जा है कि बीजेपी के पास कोई भी योजना चलाने और अपने चुनावी वादे पूरे करने लायक राजस्व ही नहीं है। इसीलिए उसके सारे चुनावी वादे झूठे साबित हो रहे हैं। सरकार ने चुनाव में सभी महिलाओं को 2100 रुपये मासिक देने का वादा किया गया था, लेकिन अब केवल चंद महिलाओं को ही यह राशि दी जा रही है।
जबकि 2024-25 में हरियाणा में 2.13 करोड़ लोग बीपीएल श्रेणी में थे, यानी इस योजना का लाभ लगभग 85 लाख महिलाओं को मिलना चाहिए था। लेकिन वर्तमान में सरकार केवल 8 लाख महिलाओं को ही राशि देने की बात कर रही है। उसमें भी अब कहा जा रहा है कि महिलाओं को केवल 1100 रुपये मिलेंगे और 1000 रुपये जमा किए जाएंगे। इस पर भी आय की सीमा, बच्चों की शिक्षा तथा कुपोषण जैसी शर्तें थोप दी गई हैं। सरकार जानबूझकर ऐसी शर्तें लगा रही है, जिससे ज्यादातर महिलाएं स्वतः लाभार्थी सूची से बाहर हो जाएं।
हुड्डा ने मनरेगा में हुए बदलाव के खिलाफ भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने दलित, पिछड़े, गरीबों, ग्रामीणों और पंचायतों के अधिकारों पर चोट पहुंचाई है। हरियाणा में 8 लाख से अधिक मनरेगा मज़दूर पंजीकृत हैं। लेकिन 2024-25 में सरकार ने सिर्फ 2100 परिवारों को ही 100 दिन का काम दिया। सरकार ने मजदूरों को ना को काम दिया और ना ही स्कीम में प्रावधान के तहत मुआवजा दिया।
एसवाईएल के सवाल पर जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बरसों पहले हरियाणा के पक्ष में आ चुका है। लेकिन फिर भी बीजेपी सरकार पंजाब के साथ मीटिंग-मीटिंग खेल रही है। जबकि कोर्ट के फैसले को इसे लागू करवाने की जिम्मेदारी केंद्र व प्रदेश सरकार की है। लेकिन दोनों जगह बीजेपी की सरकार होते हुए भी हरियाणा को उसके हक का पानी नहीं मिल पा रही है। हमने बार-बार कहा है कि सरकार को पंजाब सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का केस दायर करना चाहिए। ऐसा करने की बजाए सरकार सिर्फ वार्तालाप और बैठकों में टाइमपास कर रही है। क्योंकि बीजेपी नहीं चाहती कि हरियाणा को उसके हक का पानी मिले।



