दूषित पानी बन सकता है गंभीर बीमारियों की वजह: डॉ. आरसी सोनीहेपेटाइटिस ए और पीलिया के मरीज बढ़े, रोजाना 3-4 बच्चे अस्पताल पहुंच रहे

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दूषित पानी बन सकता है गंभीर बीमारियों की वजह: डॉ. आरसी सोनी
हेपेटाइटिस ए और पीलिया के मरीज बढ़े, रोजाना 3-4 बच्चे अस्पताल पहुंच रहे
फरीदाबाद, 12 जनवरी।
स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है, लेकिन आज भी शहर और आसपास के कई इलाकों में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है और जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. रामचंद्र सोनी (डॉ. आरसी सोनी) ने कहा कि यदि पानी का मानक स्तर सही न हो, तो वह धीरे-धीरे शरीर के लिए जहर का काम करता है। पीने योग्य पानी का पीएच स्तर 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। पानी पूरी तरह साफ, गंधहीन और स्वादहीन होना जरूरी है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, पानी में टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स (TDS) की मात्रा 500 mg/L तक सुरक्षित मानी जाती है। इसके अलावा पानी में बैक्टीरिया, वायरस, भारी धातुएं, नाइट्रेट और केमिकल्स तय सीमा में होने चाहिए। दूषित पानी पीने से डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पेचिश, हेपेटाइटिस ए व ई, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियां हो सकती हैं। लंबे समय तक गंदा पानी पीने से किडनी, लिवर और नसों पर भी बुरा असर पड़ता है। अधिक फ्लोराइड से दांत और हड्डियां कमजोर होती हैं, जबकि आर्सेनिक त्वचा रोग और कैंसर का कारण बन सकता है।
डॉ. सोनी ने बताया कि शहर में दूषित पानी के कारण हेपेटाइटिस ए और पीलिया के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अस्पताल में रोजाना 3 से 4 मरीज इन बीमारियों के लक्षणों के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। हेपेटाइटिस ए मुख्य रूप से दूषित पानी और गंदे भोजन से फैलता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण यह संक्रमण उन पर जल्दी असर करता है। शुरुआती लक्षणों में बुखार, उल्टी, पेट दर्द, थकान, भूख न लगना और आंखों व त्वचा का पीला पड़ना शामिल है।
उन्होंने बताया कि कई इलाकों में पेयजल सप्लाई लाइनों में लीकेज और गंदगी के कारण पानी दूषित हो रहा है। खुले में रखा पानी, साफ न किए गए बर्तन और बाहर का अस्वच्छ खाना भी संक्रमण की बड़ी वजह बन रहा है। हमेशा उबला या अच्छे फिल्टर से शुद्ध किया गया पानी ही पिएं। वाटर प्यूरीफायर की समय-समय पर सर्विस कराएं और पानी की नियमित जांच कराते रहें। बच्चों को बाहर के खुले और बासी खाद्य पदार्थों से दूर रखें तथा हाथ धोने की आदत डालें। उन्होंने कहा कि सुरक्षित पानी और साफ-सफाई ही स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव है।

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