फतेहपुर ब्लॉक में बाल विवाह रुकवाया, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

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  • नाबालिग लड़की की 15 फरवरी को होने वाली शादी रोकी गई
  • परिवार ने दिया आश्वासन—बालिग होने से पहले नहीं होगी शादी

फरीदाबाद, 13 फरवरी।(ANURAG SHARMA) भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने एवं प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित करने हेतु लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उपायुक्त आयुष सिन्हा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा इस अभियान को गंभीरता से क्रियान्वित किया जा रहा है। इसी क्रम में आज फतेहपुर ब्लॉक के एक गांव से एक नाबालिग लड़की का विवाह दिनांक 15 फरवरी को किए जाने संबंधी सूचना प्राप्त हुई। सूचना प्राप्त होते ही बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी हेमा कौशिक द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए थाना सदर बल्लभगढ़ के SHO एवं संबंधित पुलिस स्टाफ के सहयोग से मौके पर पहुंचकर त्वरित कार्रवाई की गई।

बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने बताया कि मौके पर पहुंचकर परिवारजनों से बातचीत की गई। लड़की के विद्यालय से संबंधित प्रमाण-पत्रों की जांच की गई, जहां से यह स्पष्ट हुआ कि लड़की अभी नाबालिग है। इस पर परिवारजनों को कानून की जानकारी देते हुए समझाया गया तथा उन्होंने लिखित/मौखिक आश्वासन दिया कि लड़की के बालिग होने से पहले उसकी शादी नहीं की जाएगी। इस आश्वासन के आधार पर परिवार को सख्त हिदायत दी गई कि यदि भविष्य में नाबालिग लड़की की शादी की जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि दूल्हा पलवल जिले का निवासी है। इस संबंध में पलवल जिले के संरक्षण/प्रोबेशन अधिकारी से अनुरोध किया गया कि वे संबंधित गांव जाकर जांच करें। संरक्षण अधिकारी सुमन चौधरी द्वारा मौके पर पहुंचकर लड़के से बातचीत की गई। उन्हें अवगत कराया गया कि नाबालिग लड़की से विवाह करना दंडनीय अपराध है तथा इस पर पोक्सो अधिनियम सहित अन्य सख्त कानूनों के तहत सजा का प्रावधान है। जांच में यह पाया गया कि लड़का बालिग है। लड़के ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे लड़की के नाबालिग होने की जानकारी नहीं थी और उसने नाबालिग लड़की से विवाह न करने की बात कही।

उन्होंने सभी नागरिकों से की कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की एवं 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह न करें। नाबालिग विवाह कराए जाने की स्थिति में न केवल परिवारजन बल्कि पंडित, मैरिज गार्डन/स्थल संचालक, हलवाई आदि सभी सहयोगी व्यक्तियों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है, क्योंकि यह कानूनन अपराध है।

उन्होंने लड़के वालों से विशेष रूप से अनुरोध किया कि विवाह से पूर्व लड़की की आयु का प्रमाण अवश्य जांच लें—जैसे जन्म प्रमाण-पत्र या विद्यालय प्रमाण-पत्र। लड़की के 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत ही विवाह किया जाए। अन्यथा दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक की सजा एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, बालिग लड़के द्वारा नाबालिग लड़की से विवाह किए जाने पर पोक्सो अधिनियम एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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