पिछले एक माह से बिस्तर तक सिमट चुकीं 63-वर्षीय महिला की फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद में हुई जटिल हिप रिवीज़न सर्जरी, अब पुनः चलने-फिरने में समर्थ

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फरीदाबाद, 06 मई, 2025: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने पिछले एक माह से बिस्तर तक सिमट चुकी 63-वर्षीय महिला के बाएं कुल्हे की दोबारा सर्जरी करने के बाद उन्हें चलने-फिरने में सक्षम बनाया है। इससे पहले उनकी टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी असफल रही थी। डॉ आशुतोष श्रीवास्तव, एडिशनल डायरेक्टर, आर्थोपिडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने बुजुर्ग महिला की दूसरी बार टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की जिसमें प्रॉक्सिमल फीमर मेगा प्रोस्थेसिस (इस बड़े आकार के कस्टमाइज़्ड प्रोस्थेटिक इंप्लांट का इस्तेमाल, अधिक बोन लॉस या डैमेज होने की स्थिति में फीमर के ऊपरी भाग के स्थान पर किया जाता है) का इस्तेमाल किया गया था। यह सर्जरी लगभग एक घंटे तक चली और अगले ही दिन मरीज चलने लगी थीं।

2008 में उक्त महिला गिर गई थी और इसके बाद उनके बाएं हिप की बाइपोलर प्रोस्थेसिस सर्जरी (जिसमें हिप ज्वाइंट का केवल बॉल बदला गया था) फरीदाबाद के ही एक अन्य अस्पताल में की गई। लेकिन 2018, में सीढ़ियों पर से वह दोबारा गिर गयीं, जिसके चलते पिछला रिप्लेसमेंट बेकार हो गया। नतीजा यह हुआ कि उन्हें टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी करवानी पड़ीं, जिसमें हिप ज्वाइंट्स के दोनों बॉल्स (फीमरल हेड) तथा सॉकेट (एसिटाबुलम) को बदला गया और उनके स्थान पर धातु और मेडिकल-ग्रेड प्लास्टिक के कृत्रिम हिस्से लगाए गए। इस सर्जरी के बाद वह घर में सीमित मोबिलिटी के साथ सिमटकर रह गई थीं और अधिकांश समय बिस्तर पर ही बिता रही थीं। लगभग एक माह तक वह इसी कंडीशन के साथ रहीं और इसके बाद उन्होंने डॉ आशुतोष श्रीवास्तव, एडिशनल डायरेक्टर, आर्थोपिडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद से कंल्सल्ट किया।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदबाद में भर्ती होने के बाद, उनके रेडियोलॉजिकल स्कैन किए गए जिनसे पता चला कि उनकी जांघ की हड्डी (फीमर) का ऊपरी हिस्सा, जो कि हिप इंप्लांट को संभालता था, पिछले टोटल हिप रिप्लेसमेंट के असफल होने के बाद काफी बिगड़ गया था। इस हड्डी को काफी क्षति पहुंच चुकी थी और वह रेग्युलर हिप इंप्लांट को संभालने लायक नहीं रह गई थे, यानि उनके मामले में मानक हिप रिप्लेसमेंट का विकल्प नहीं बचा था। इस मामले की जटिलता के मद्देनज़र, डॉक्टरों की टीम ने उनकी रिवीज़न टोटल हिप रिप्लेसमेंट यानि करेक्टिव सर्जरी करने का फैसला किया जो कि पिछले हिप इंप्लांट के बेकार होने के बाद की गई, और इसके लिए लंबे आकार की प्रॉक्सिमल फीमर मेगा प्रोस्थेसिस, जो कि खास डिजाइन का इंप्लांट है, का इस्तेमाल न केवल हिप ज्वाइंट बल्कि जांघ की हड्डी के एक हिस्से को भी बदला गया। इस प्रकार के इंप्लांट का इस्तेमाल आमतौर से हड्डी के अत्यधिक क्षय होने और मानक इंप्लांट को सपोर्ट करने के लिए किसी स्ट्रक्चर (संरचना) के उपलब्ध नहीं होने पर किया जाता है। लगभग एक घंटे चली इस सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया, और अगले ही दिन से मरीज चलने लगी थीं।

इस मामले की और जानकारी देते हुए, डॉ आशुतोष श्रीवास्तव, एडिशनल डायरेक्टर, आर्थोपिडिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “यह काफी चुनौतीपूर्ण मामला था क्योंकि इसमें सपोर्टिव बोन नहीं थी और मरीज की पिछली सर्जरी के चलते भी जटिलता बढ़ गई थीं। ऐसे में सर्जरी में देरी होने पर वह स्थायी रूप से बिस्तर तक सिमट सकती थीं। लेकिन सावधानीपूर्वक की गई प्लानिंग और सर्जिकल हस्तक्षेप से हम उनकी मोबिलिटी को दोबारा वापस लाने में सफल रहे और वह आत्मनिर्भर भी हो गई हैं। इस प्रकार की जटिल रिवीज़न सर्जरी में सटीकता के साथ-साथ अनुभव की भी आवश्यकता होती है ताकि श्रेष्ठ परिणाम हासिल किए जा सकें। इस मामले में, यदि मरीज का समय पर इलाज नहीं होता, तो वह आजीवन बिस्तर पर रहने के लिए मजबूर हो सकती थीं।”

योगेंद्र नाथ अवधीया, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल फरीदाबाद ने कहा, “मरीज की उम्र और उनकी जटिलताओं के चलते यह मामला वाकई काफी मुश्किल भरा था। लेकिन डॉ आशुतोष श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सही उपचार से मरीज को दोबार चलने-फिरने लायक बना दिया है। फोर्टिस एस्कॉर्टस हॉस्पीटल फरीदाबाद में अनुभवी क्लीनिशियनों की एक्सपर्ट टीम है और साथ ही एडवांस टेक्नोलॉजी भी उपलब्ध है जो सटीक डायग्नॉसिस और उपचार प्रदान कर मरीजों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करते हैं। इस मरीज की रिकवरी ने मरीज को ही लाभ नहीं पहुंचाया बल्कि मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने की हमारी क्लीनिकल टीमों की ताकत और उनके समर्पण को भी एक बार फिर साबित किया है।”

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