पेट के दुर्लभ किस्म के जन्मजात विकार से पीड़ित 11-वर्षीय बच्ची का फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद ने मिनीमॅली इन्वेसिव सर्जरी की सहायता से किया सफल उपचार

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– *यह विकार दुनियाभर में मात्र 0.063% आबादी में ही देखा गया है – *

फरीदाबाद, 01 अप्रैल, 2026: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने करीब दो हफ्तों से लगातार नाभि के आसपास पेट दर्द की शिकायत से पीड़ित 11-वर्षीय बच्ची का सफल उपचार किया है। अस्पताल में इस बच्ची की विस्तृत जांच के बाद पता चला था कि वह एक दुर्लभ किस्म के जन्मजात विकार इंफेक्टेड यूराचल सिस्ट से पीड़ित थी, जिसकी वजह से उसे पेट में तकलीफ थी। इंफेक्टेड यूराचल सिस्ट एक दुर्लभ जन्मजात विकार है जिसमें मूत्राशय को नाभि से जोड़ने वाली तरल पदार्थ की थैली यूराचस (भ्रूण संरचना) ठीक से बंद नहीं होती है। अस्पताल में डॉ अनूप गुलाटी, डायरेक्टर – यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने मिनीमॅली इन्वेसिव तकनीक की मदद से बच्ची का उपचार किया ताकि वह सुरक्षित ढंग से जल्द-से-जल्द स्वास्थ्यलाभ कर सके।

इस बच्ची को लगातार पेट में दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था और दर्द की कोई वजह समझ नहीं आ रही थी। एडवांस इमेजिंग जांच से पता चला कि मूत्राशय को नाभि से जोड़ने वाले एक मामूली आकार वाले ऊतक में इंफेक्शन और सूजन है। हालांकि, संक्रमित यूराचल सिस्ट होना काफी असामान्य है, लेकिन इसकी वजह से लगातार पेट दर्द और समय पर उपचार नहीं करवाने पर अन्य कई तरह की जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। अस्पताल में शुरुआती जांच और सर्जरी से पूर्व किए गए मूल्यांकनों के बाद, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद की यूरोलॉजी टीम ने मिनीमॅली इन्वेसिव लैपरोस्कोपिक (कीहोल) सर्जरी की सहायता से इस संक्रमित ऊतक (इंफेक्टेड टिश्यू) को हटाया। प्रक्रिया के दौरान, इस इंफेक्टेड सिस्ट और टिश्यू को पूरी तरह से हटाया गया और आंतरिक संरचनाओं को सुरक्षित रूप से अलग किया गया। उपचार के लिए ओपन सर्जरी की बजाय छोटे आकार के चीरे लगाए गए ताकि मरीज की रिकवरी जल्द से जल्द हो सके। यह सर्जरी सफल रही और बच्ची की रिकवरी भी बिना किसी जटिलताओं के कम समय में हो गई। दो दिनों के भीतर ही मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। पांच दिनों के बाद यूरीनरी कैथेटर भी हटा लिया गया और अब मरीज को दर्द से पूरी तरह से छुटकारा मिल चुका है तथा वह सामान्य तरीके से रिकवर हो रही है।

इस मामले की और जानकारी देते हुए, डॉ अनूप गुलाटी, डायरेक्टर – यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “आमतौर से यूराचल संबंधी विकार काफी दुर्लभ होते हैं और इनकी वजह से कोई खास लक्षण भी नहीं उभरकर आते, इसलिए समय पर डायग्नॉसिस करना काफी महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में, आरंभिक मूल्यांकन और मिनीमॅली इन्वेसिव लैपरोस्कोपिक सर्जरी की सहायता से इंफेक्टेड टिश्यू को पूरी तरह हटाने की प्रक्रिया में मरीज को न्यूनतम ट्रॉमा से गुजरना पड़ा। इस बच्ची ने काफी तेजी से रिकवरी की और किसी तरह की जटिलताएं भी नहीं हुईं, जिसने पिडियाट्रिक यूरोलॉजी की सुरक्षा और एडवांस लैपरोस्कोपिक तकनीकों के कारगर होने की पुष्टि की है।”

डॉ अभिषेक शर्मा, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “इस सफलता ने, दुर्लभ पिडियाट्रिक यूरोलॉजिकल कंडीशन के मामलों में शीघ्र डायग्नॉसिस के महत्व और एडवांस मिनीमॅली इन्वेसिव सर्जिकल तकनीकों की भूमिका को रेखांकित किया है। एक्सपर्ट क्लीनिकल केयर और आधुनिक सर्जिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के सहारे, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद बच्चों एवं वयस्कों के लिए लगातार सुरक्षित, सटीक और मरीज-केंद्रित उपचार सुविधाएं सुनिश्चित करता है।”

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