फरीदाबाद:(ANURAG SHARMA) फरीदाबाद के एनआईटी दशहरा मैदान पर इस बार न झूलों का रोमांच, न मेले की चहल-पहल। बच्चों के चेहरे उदास, तो वर्षों से दुकान लगाकर गुजारा चलाने वाले गरीब दुकानदार रोजगार के लिए परेशान।
फरीदाबाद के एनआईटी स्थित दशहरा मैदान पर इस बार परंपरागत मेले की चमक गायब रही। झूले नहीं लगने दिए जाने से बच्चों और परिवारों को निराशा हुई, जबकि मेले में दुकान लगाने वाले गरीब दुकानदारों की दुकानें हटाई जाने से उनकी मेहनत और रोजगार दोनों पर सवाल खड़े हो गए।
बच्चों की उम्मीदें टूटीं
हर साल दशहरा मेले में झूलों, खिलौनों और मनोरंजन के लिए बड़ी संख्या में बच्चे और परिवार पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मैदान में झूले न लगने से बच्चे मायूस लौटे और मेले का आकर्षण काफी कम हो गया।
एक माता ने कहा, बच्चे कई दिन पहले से झूले खेलने की बात कर रहे थे, लेकिन यहां आकर पता चला कि कुछ नहीं है। दशहरा बिना झूलों के अधूरा लगा।
गरीब दुकानदारों की मजबूरी
मेले में सालों से दुकानें लगाने वाले छोटे दुकानदारों, खिलौना विक्रेताओं और खाने की दुकान चलाने वालों के लिए दशहरा साल का अहम कमाई का अवसर होता है। दुकानें हटाए जाने से उनका पूरा निवेश और मेहनत बेकार होने का खतरा पैदा हो गया।
एक दुकानदार ने कहा, “हम दिन-रात तैयारी करके आते हैं, लेकिन अचानक हटाने का आदेश मिल गया। घर चलाने वालों के लिए यह सिर्फ दुकान नहीं, रोजगार है।
प्रशासन का तर्क, जनता का सवाल
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और हादसों से बचाव के मद्देनजर झूलों पर रोक लगाई गई है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, इसके लिए झूलों की जांच और नियमों का पालन कराया जा सकता था, न कि पूरे मेले का उत्साह ही समाप्त कर दिया जाता।
लोगों की मांग है कि आगामी आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए झूलों और दुकानदारों को व्यवस्थित स्थान दिया जाए, ताकि त्योहार अपना पूरा आनंद ले सके और गरीब दुकानदारों की आजीविका भी बच सके।
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