विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस: हड्डियों की कमजोरी सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या नहीं, जानें इसके जोखिम

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फरीदाबाद: (ANURAG SHARMA) ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। आमतौर पर माना जाता है कि यह बीमारी बढ़ती उम्र के लोगों, खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं को होती है। लेकिन कम उम्र के लोगों में भी पोषण की कमी, हार्मोन में बदलाव और गलत जीवनशैली के कारण हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। हर साल 20 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद सेक्टर-88 के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. अंकुर धीमान ने बताया कि “ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है, जब मामूली गिरने या हल्की चोट लगने से उनकी हड्डी टूट जाती है। रीढ़ की हड्डी, कूल्हे और कलाई में फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक रहता है। इसलिए हड्डियों की कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।“
हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी बहुत जरूरी हैं। कैल्शियम हड्डियों को मजबूती देता है, जबकि विटामिन डी शरीर को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। दूध, दही, पनीर और हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, पर्याप्त धूप लेना भी विटामिन डी के स्तर को बनाए रखने में मदद कर सकता है।
डॉ. धीमान के अनुसार, “लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन हड्डियों को कमजोर कर सकता है। महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से हड्डियों का नुकसान तेजी से हो सकता है। वहीं, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की कमी भी इसका कारण बन सकती है। थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं, कुछ पुरानी बीमारियां, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल, कम वजन और परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास भी जोखिम बढ़ाते हैं।“
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव के लिए संतुलित भोजन, नियमित पैदल चलना और अपनी क्षमता के अनुसार वजन उठाने वाले व्यायाम करना जरूरी है। जिन लोगों में फ्रैक्चर या हड्डियों की कमजोरी का खतरा अधिक है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट कराना चाहिए। समय पर जांच, सही खानपान और उचित इलाज से हड्डियों को मजबूत रखने, फ्रैक्चर का खतरा कम करने और लंबे समय तक सक्रिय जीवन जीने में मदद मिल सकती है।

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