फरीदाबाद, 26 जून – लिंग्याज विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी) को मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, भारत सरकार के अंतर्गत साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च विभाग द्वारा साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च ऑगनाइजेशन के रूप में मान्यता दी गई है। यह सम्मान पिछले 25 वर्षों में संस्थान के उत्कृष्ट अकादमिक अनुसंधान योगदान के लिए दिया गया है।
यह मान्यता लिंग्याज विद्यापीठ के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए व्यापक अनुसंधान कार्यों को ध्यान में रखते हुए दी गई है, जिनमें इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, लॉ, फार्मेसी, आर्किटेक्चर, एग्रीकल्चर और बायो टेक्नोलोजी शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने इन क्षेत्रों में रिसर्च पब्लिकेशन, पेटेंट, कॉपीराइट्स और पीएचडी थीसिस में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
प्रो चांसलर डॉ. राजेश कपूर ने इस मान्यता पर गर्व और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और प्रौद्योगिकी द्वारा हमारे मजबूत रिसर्च संस्कृति और अकादमिक उत्कृष्टता की निरंतर खोज को मान्यता दी गई है। यह पूरे लिंग्याज ग्रुप के लिए गर्व का क्षण है।
इस अवसर पर डॉ. कपूर ने विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। हम ऐसा वातावरण बना रहे हैं जो अत्याधुनिक अनुसंधान और अंतःविषय सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने कहा कि यह सब चांसलर डॉ. पिचेश्वर गड्डे के मार्गदर्शन और नेतृत्व का ही परिणाम है। जिन्होंने लिंग्याज विद्यापीठ को अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता की ओर अग्रसर किया है।
उन्होंने बताया कि लिंग्यांज विद्यापीठ का मिशन ज्ञान और नवाचार को उन्नत अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से बढ़ावा देना है, जिससे राष्ट्र के वैज्ञानिक और औद्योगिक विकास में योगदान दिया जा सके। इस मान्यता से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों के साथ सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा, जिससे विश्वविद्यालय के वैश्विक अनुसंधान और शिक्षा केंद्र बनने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया जा सके।

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