सैनिक कॉलोनी (फ़रीदाबाद):ANURAG SHARMA कहने को तो यह फ़रीदाबाद का बेहद पॉश इलाका माना जाता है। जहाँ बड़े-बड़े नेताओं की कोठियां हैं और नामी व्यापारियों का आशियाना है। लेकिन धरातल की हकीकत इस चमचमाती तस्वीर के बिल्कुल उलट है। आज सैनिक कॉलोनी के ए-ब्लॉक मार्केट के मुख्य रास्ते का जो हाल हो चुका है, उसे देखकर कोई भी इसे वीआईपी इलाका मानने से साफ इनकार कर देगा। मार्केट की मुख्य सड़क पर इस कदर कूड़े का पहाड़ लगा है कि राहगीरों का वहां से गुजरना किसी सजा से कम नहीं है।
नाक बंद करके निकलने को मजबूर लोग, क्या सो रही है RWA एसोसिएशन?
तस्वीरें साफ बयां कर रही हैं कि किस तरह कचरे के बड़े-बड़े ढेरों ने आधे रास्ते को अपनी चपेट में ले लिया है। यहाँ से उठने वाली भयंकर बदबू के कारण स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और मार्केट आने वाले ग्राहकों को अपनी नाक पर रुमाल या हाथ रखकर निकलना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यहाँ की RWA (रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) पर खड़ा होता है। जनता पूछ रही है कि क्या इस भीषण गंदगी और बदबू की जानकारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों को नहीं है? या फिर जानबूझकर इस गंभीर समस्या पर आँखें मूंद ली गई हैं?
घरों का कूड़ा उठाने वाले ही यहाँ बना रहे हैं कचरे का ‘पहाड़’!
सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, इस गंदगी के असली जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि कॉलोनी के घरों से कचरा इकट्ठा करने वाले वेंडर (कूड़े वाले) ही हैं। बताया जा रहा है कि घरों से कूड़ा उठाने के बाद, ये लोग मुख्य मार्केट के इस रास्ते को ही अपना डंपिंग स्टेशन समझ बैठे हैं और सारा कचरा यहीं लाकर सड़क पर फेंक कर चले जाते हैं।
बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा, नेताओं और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल!
जिस पॉश कॉलोनी में बड़े-बड़े रसूखदार और राजनेता रहते हैं, वहाँ के मुख्य बाजार का यह हाल प्रशासनिक नाकामी और स्थानीय आरडब्ल्यूए की ढुलमुल कार्यशैली को साफ दर्शाता है। खुले में पड़े इस सड़ते हुए कचरे और प्लास्टिक के कारण न सिर्फ आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, बल्कि इस बदबू से आसपास के इलाकों में भयंकर बीमारियां फैलने का भी खतरा चौबीसों घंटे बना हुआ है।
एनआईटी (NIT) के अंतर्गत आने वाली सैनिक कॉलोनी की जनता अब आरडब्ल्यूए और नगर निगम प्रशासन से सीधे जवाब मांग रही है कि आखिर कब तक टैक्स देने के बावजूद उन्हें इस नरकीय स्थिति में रहने को मजबूर किया जाएगा?


